सवाल उतने नहीं है, जवाब जितने हैं

मै बहुत छोटे दिमाग वाला आदमी हु जो बहुत कम दुरी की बाते सोचता है....या यु कहे की बहुत कम बार सोचने का दुस्साहस करता है. मै पहले भी कह चूका हु की भ्रस्ताचार हमारे बिचारो में घुस  चूका है. अब हम भ्रस्ताचार की जीवन शैली जी रहे है इसमे आप  धरना करके और उपवास करके कुछ नहीं कर  सकते . इसमें आप की सरकार बिशेष का भी दोष नहीं दे सकते. ये सब हमारे जीवनशैली और दृष्टिकोण का दोष है. हम सभी चिल्ला रहे है इसलिए नहीं की कोई क्यों लुट रहा है देश को बल्कि की इसलिए की हम इस लूट के हिस्सा हम क्यों नहीं है ? ऐसे में धरना या उपवास या फिर कोई भी नियम-कानून कुछ नहीं कर सकता क्योकि भ्रस्ताचार का बिनाश हमसे शुरू होता है किसी सरकार से नहीं. तो होना तो ये चाहिए था की रामदेव बाबा या अन्ना बाबा पहले हमारे जीवनशैली में सुधार लाते फिर सारी चीज़े अपने आप बदल जाती. कबीर बाबा हजारो बर्ष आगे ही कह गए है की . बड़ा अजीब लगता है की सरकार के तारणहार बाबा रामदेव की संपत्ति पर प्रश्न उठाए जा रहे है जब की उनको पता है की बाबा सारे तरह के जाचो में सहयोग देने को तैयार है पर यही तारणहार श्री करुणनिधि जी के पूरा खानदान द्वारा किये गए लूट को लेकर काम में तेल दाल लेते है. बाह रे मेरी प्यारी, इमानदार जनता की सरकार !! अगर किसी लोकतान्त्रिक सर्कार का किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बिरुद्ध यही ब्यवहार ठीक है तो फिर जलियावाला बाग़ में जो हुआ था उसमे बुरा क्या था ?? 
अन्दर का पट खोल के, बाहर का पट खोल

खैर आपने अपने तरीके है और अपने अपने धंधे. पर मुझे इसका अफसोश नहीं है की हमारे बाबाओ ने क्या किया अफसोश इस बात का है की हमारे सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े पुरोधाओ ने क्या किया?? रात को १२ बजे आप हजारो के बीद पर लाठी बरसाते है ..वो भी ऐसी भीड़ जो आपसे इस बात की शांति पूर्ण ढंग से मांग कर रही है की भारत बर्ष का काला धन जो बाहर पडा हुआ है उसे आप वापस लाइए. इस मांग में मुझे तो कोई बुराई नजर नहीं आयी. इसके बदले में हमारी सरकार ने क्या किया?? पहले तो अपने हनुमानो को भेजा की जाओ उनको समझाओ . जब बात नहीं बनी तो फिर ब्याक्तिगत गाली गलुज पे उतर आये.और जब कोई भी शस्त्र जब काम नहीं किया तो लाठी लेके दौड़े. मुझे वास्तव में आश्चर्य होता है की ये वाही लोग है जो नक्सलवादियो, काश्मीर और उत्तर पूर्व के आतंकवादियों के पैरो पे गिडगिडाए  फिरते है की शास्त्र छोड़ो आओ हम बाते करते है तुम्हारी मांगो को लेकर. मै अभी तक नहीं समझ पाया की सरकार इतना अधीर क्यों हो गयी या फिर इतना लाचार क्यों हो गयी की उसको रात के १२ बजे लाठी उठाना पडा?? अखित सरकार को किसका भय था ?? और  इन सबमे खतरनाक है हमरे परम प्रिय मनमोहन सिंह और हमारे युवराज राहुल गाँधी की चुप्पी. अभी कुछ दिन पहले जिस तरह से यूराज ने नॉएडा के गाव में हुई घटनाओं पर तत्परता दिखाई थी अगर वाही तत्परता यहाँ दिखाते तो कितना अच्छा होता. कितना अच्छा होता की हमारे बिद्वान प्रधान मंत्री ये जनता को बतला सकते की आधी रात को ये करवाई इतनी अनिवार्य क्यों हो गयी थी. और ये अनिवार्यता और तत्परता हमारे आतंकवादी संगठनो के बिरुद्ध क्यों नहीं दिखाती सरकार ?? अगर बाबा रामदेव ठग है तो सरकार एक ठग से इतनी डरी हुई क्यों है ??

1 आपकी राय:

  1. shivam pandey said...:

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    aap mujhse yha mil sakte hai
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    mujhe umeed hai aap humse sampark jaroor karege

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