भ्रष्टाचार रहित भारत : कुछ भयानक भूले II

भ्रस्टाचार अभी भी 'गरम माल' है बाज़ार में.  अभी भी हमारे समाचार पत्र इस 'चीज़' को महत्व दे रहे है. अभी भी हम इस 'चीज़' की बात कर रहे है. पर ठहरी तो 'चीज़' ही न कब तक याद रहेगी. हलाकि लोग शुरू कर दिए की हम इसके अलावा भी कुछ सोचना शुरू कर दिए है. बहन मायावती ने कहा की लोकपाल बिधेयक को  बनाने वाली समिति में कोई अनुसूचित जाती का कोई क्यों नहीं है ??  सबसे बड़ी बात है की इस देश के महान राजनितिक  दल के कुछ महान नेताओ ने उनका समर्थन  भी शुरू कर दिया है (नहीं भाई ये सेकुलर लोग है बस देश की प्रगति के लिए काम करते है )कितनी मेहनत करती है बहन जी. समिति अभी बनी नहीं की दीदी जाति की...

भारतीय भ्रस्टाचार और हमारा योगदान

भ्रस्टाचार अभी भी 'हॉट टोपिक ' है बाज़ार में . आप कुछ भी कहो कुछ भी लिखो..चलेगा ही नहीं दौड़ेगा भी ...आधे  जानते ही नहीं  की 'लोकपाल बिधेयक' है क्या ?? और आधो को रोटी ज्यादा ज़रूरी लगाती है इस बिधेयक से.  खैर इसमे भी कोई बुरे सबकी अपनी अपनी मजबूरी है. कोई शौक से भूखा है और कोई मजबूरी से भूखा है . तो मै पिछले बार भी कहा था की हम भारतीय बहुत साड़ी चीज़े शौक से करते है....

भ्रष्टाचार रहित भारत : कुछ भयानक भूले

पिछले सप्ताह के समाचार पत्र अगर आप उठा के देखे तो आपको पता चलेगा की भारत सबसे ज्यादा चिंतित भ्रष्टाचार को ले के था. सारे समाचार भ्रष्टाचार को  ले के थे. बुधजीवियो की सबसे बड़ी चिंता भ्रष्टाचार थी. भारत के १२० करोड़ लोगो की चिंता अचानक बढ़ गयी भ्रष्टाचार को ले . मै खुद भी हैरान हो गया की बर्ड फ्लू की तरह ये भ्रष्टाचार हमारे यहाँ कैसे घुस  आया ? हम संसार के सबसे अछे आचरण...