भ्रस्टाचार अभी भी 'गरम माल' है बाज़ार में. अभी भी हमारे समाचार पत्र इस 'चीज़' को महत्व दे रहे है. अभी भी हम इस 'चीज़' की बात कर रहे है. पर ठहरी तो 'चीज़' ही न कब तक याद रहेगी. हलाकि लोग शुरू कर दिए की हम इसके अलावा भी कुछ सोचना शुरू कर दिए है. बहन मायावती ने कहा की लोकपाल बिधेयक को बनाने वाली समिति में कोई अनुसूचित जाती का कोई क्यों नहीं है ?? सबसे बड़ी बात है की इस देश के महान राजनितिक दल के कुछ महान नेताओ ने उनका समर्थन भी शुरू कर दिया है (नहीं भाई ये सेकुलर लोग है बस देश की प्रगति के लिए काम करते है )कितनी मेहनत करती है बहन जी. समिति अभी बनी नहीं की दीदी जाति की...