Jhansi Ki Rani : Subhadra kumari Chauhaan

झाँसी की रानीसिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी, लक्ष्मीबाई...

Main chamaron ki gali tak le chaloonga aapko : Adam Gondvi

 ‘‘ मैंने अदब से हाथ उठाया सलाम को, समझा उन्होंने इससे है खतरा निजाम को।     चोरी न करें, झूठ न बोलें तो क्या करें, चूल्हे पे क्या उसूल पकायेंगें शाम को।’’ अदम गोंडवी ...