Main chamaron ki gali tak le chaloonga aapko : Adam Gondvi


 ‘‘ मैंने अदब से हाथ उठाया सलाम को, समझा उन्होंने इससे है खतरा निजाम को। 
    चोरी न करें, झूठ न बोलें तो क्या करें, चूल्हे पे क्या उसूल पकायेंगें शाम को।’’
अदम गोंडवी





Online listen Hindi poem : Hai Andheri Raat Par Diva Jalana Kab Mana Hai - Harivansh Rai Bachchan

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है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है सुने   Hai andheri raat par diyaa jalaana kab mana hai! LISTEN






                                                है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था, भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था
स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा, स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था
ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों को, एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

बादलों के अश्रु से धोया गया नभ-नील नीलम, का बनाया था गया मधुपात्र मनमोहक, मनोरम
प्रथम ऊषा की किरण की लालिमा-सी लाल मदिरा, थी उसी में चमचमाती नव घनों में चंचला सम
वह अगर टूटा मिलाकर हाथ की दोनों हथेली, एक निर्मल स्रोत से तृष्णा बुझाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

क्या घड़ी थी, एक भी चिंता नहीं थी पास आई, कालिमा तो दूर, छाया भी पलक पर थी न छाई
आँख से मस्ती झपकती, बात से मस्ती टपकती, थी हँसी ऐसी जिसे सुन बादलों ने शर्म खाई
वह गई तो ले गई उल्लास के आधार, माना, पर अथिरता पर समय की मुसकराना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

हाय, वे उन्माद के झोंके कि जिनमें राग जागा, वैभवों से फेर आँखें गान का वरदान माँगा
एक अंतर से ध्वनित हों दूसरे में जो निरंतर, भर दिया अंबर-अवनि को मत्तता के गीत गा-गा
अंत उनका हो गया तो मन बहलने के लिए ही, ले अधूरी पंक्ति कोई गुनगुनाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

हाय, वे साथी कि चुंबक लौह-से जो पास आए, पास क्या आए, हृदय के बीच ही गोया समाए
दिन कटे ऐसे कि कोई तार वीणा के मिलाकर, एक मीठा और प्यारा ज़िन्दगी का गीत गाए
वे गए तो सोचकर यह लौटने वाले नहीं वे, खोज मन का मीत कोई लौ लगाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना, कुछ न आया काम तेरा शोर करना, गुल मचाना
नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका, किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से, पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

Online listen Hindi poem : Koi Gaata Main So Jaata - Harivansh Rai Bachchan


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Koi Gaata Main So Jaata listen    को‌ई गाता मैं सो जाता यहाँ सुने







कोई गाता, मैं सो जाता!
संसृति के विस्तृत सागर पर, सपनों की नौका के अंदर
सुख-दुख की लहरों पर उठ-गिर बहता जाता मैं सो जाता!
                    कोई गाता मैं सो जाता!

आँखों में भरकर प्यार अमर,आशीष हथेली में भरकर
कोई मेरा सिर गोदी में रख सहलाता, मैं सो जाता!
               कोई गाता मैं सो जाता!

मेरे जीवन का खारा जल,मेरे जीवन का हालाहल
कोई अपने स्वर में मधुमय कर बरसाता, मैं सो जाता!
                   कोई गाता मैं सो जाता! 


koi gaata main so jaata

sansriti ke vistrit saagar par, sapanon ki nauka ke andar
dukh sukh ki laharon par uth gir, bahata jaata, main so jaata
koi gaata main so jaata
aankho mein lekar pyaar amar, aashish hatheli mein bhar kar
koi mera sar godi mein rakh, sahalaata, main so jaata
koi gaata main so jaata
mere jivan ka khaaraa jal, mere jivan ka haalaahal
koi apane svar mein madumay kar, doharaata, main so jaata
koi gaata main so jaata 



Truth of news : समाचारों का सच

बचपन में सुना था की कलम में वो शक्ति है जो साता की शक्तिशाली गलियारों को भी हिला शक्ति है.कुछ दिनों से में सोच रहा था की सच में ऐसा है? मै बहुत दिनों का इतिहास तो नहीं जानता पर मेरे जानकारी में ऐसा कोई उदहारण नहीं है जहा पर इस कलम ने सत्ता के बिरुध कुछ किया हो. हा सत्ता के पक्ष में बहुत सारा अक्षपात अवश्य किया है . बड़ा अजीब लगता है की जब यह भी समाचार मुख्य पृष्ठ पर आने लगे की सचिन तेंदुलकर ने अपनी मोटर कार बेच दी. जब ऎसी भी बाते समाचार बनने लगे तो संदेह होने लगता है की हमारे समाचार पत्र. या समाचार चैनेल वाले लोग सअमाचार को लेकर ज्यादा गंभीर है! क्या वास्तव में वो जनता को सच्चाई बताने के लिए तत्पर है! क्या वास्तव में उनमे इतना साहस है की वो सच बोल सके! मुहे तो कभी नहीं लगा. मुझे वो गहराई कभी नहीं दिखी. सर्वप्रथम अगर हम विषय को लेकर बात करे. उदाहरण के लिए हम हाल में हुए गैस और डीजल के दामो में हुए बढ़ोतरी की बात करे तो हम पाते है की सारे खबरिया चैनेल वाले घूम घूम के लोगो का साक्षात्कार ले रहे थे की कैसे ये बढे दाम उनके जीवन को प्रभावित करेंगे. और लोग भी टीवी पर दिखने के लिए अनाप सनाप बके जा रहे थे. कुछ को चिंता रही की वो चिप्स नहीं खा पायेंगे तू कुछ मरे जा रहे थे की 'ब्यूटी पअर्लर' में उनका आना कम हो जायेगा . खैर जो भी हो. होना तो ये  चाहिए की ये चैनल वाले अपनी ऊर्जा इस पर खर्च करे की ये दाम क्यों बढे है या फिर ये बढ़ोतरी क्या अव्श्यव्म्भावी थी या कुछ और पते भी थे . पर इन बातो को पता लगाने या इन पर चर्चा करने के लिए समय और ज्ञान दोनों की आवशयकता होती है पर इन दोनों चीजों का घोर आभाव है इन लोगो के पास. अगर ऊपर दिए हुए चित्र को देखे तो आपको पता लगेगा की ये भारत बर्ष के 'सबसे तेज' समाचार चैनेल से लिया गया है. अब सबसे तेज होने के चक्कर में ये लोग इतना भी भूल गए की भारत-बेस्तइंडीज का दूसरा टेस्ट मैच २८ जून से खेला जाएगा न की २८ जुलाई से. तो अगर गुडवत्ता और तेजी में किसी के एक चुनना हो तो उन्होंने तेजी को चुना जिससे उनका हो सके भला हो पर जनता का चुना लगाना तय है. 
अब थोड़ी भाषा की बात हो जाय. छोटे में रेडियो के समाचार वाचको के बोलने के और  शब्दों की नक़ल किया करते थे हम. पर आजकल तो पता ही नहीं चलता ही की हम समाचार सुन रहे है या फिर मंच पर नाटक चल रहा है! एक समाचार वाचक पर एक चुटकुला सुना है मैंने. समाचार वाचक परेशान हो अपने मित्र से कहता है 'यार इस नौकरी ने मुझे परेशान कर रखा है. घर पे पत्नी पुछती है की सब्जी कैसी बनी है तो मुह से निकल जाता है 'सनसनीखेज''. मुझे लगता है की ये चुटकुला ही अपने आप में सब कह जाता है. विचारो का निर्माण करने वाली कलम आज खुद दिग्भ्रमित हो के घुमे जा रही है.